Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

मासे मासे व्यतिक्रान्ते, यः पिबत्यम्बु केवलं। विमुह्यति नरः सोऽपि, सङ्गमासाद्य सुभ्रुवः।। घास फूँस तृण जे भखें, तिन्हे सतावे काम। षट् रस भोजन जे करे, उनकी जाने राम।।

जो एक माह के अन्तराल से केवल पानी लेता है, ऐसा साधु भी स्त्री की सङ्गति पाकर मोहित हो जाता है, फिर जो षट् रस भोजन करते हैं उनको कितनी काम की बाधा होगी? घास फूँस तृण जे भखें, तिन्हे सतावे काम। षट् रस भोजन जे करे, उनकी जाने राम।।

Even a sadhu who takes only water once a month is bewildered on gaining the company of a woman; then how much greater will the affliction of lust be for those who eat food of six flavours? Those who eat only grass, straw and blades of grass are still tormented by lust - as for those who eat the six-flavoured feast, God alone knows.

— आराध्य सूत्र · #33

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य