Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

हावो मुख विकारः स्याद्, भावः चित्तोत्थ उच्यते। विलासो नेत्रजो ज्ञेयो, विभ्रमो भ्रूःयुगान्तयोः।।

स्त्रियों के मुख के विकार को 'हाव' कहते हैं, मन में उत्पन्न विकल्पों को 'भाव' कहतें हैं, नेत्रों के चलाने को 'विलास' कहते हैं और दोनों भोहों के चलाने को 'विभ्रम' कहते हैं।

A woman's facial changes are called 'haava,' the notions arising in the mind 'bhaava,' the play of the eyes 'vilaasa,' and the movement of the two eyebrows 'vibhrama.'

— आराध्य सूत्र · #30

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य