Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

ग्लानि, मूर्च्छा, भ्रान्ति, कम्पन, श्रम, पसीना, अङ्गो में विकार तथा क्षय रोगादिक दोष प्राणियों में मैथुन से उत्पन्न होते हैं।

Nausea, fainting, delusion, trembling, fatigue, sweating, disorders in the limbs, and diseases like tuberculosis arise in beings from sexual union.

— आराध्य सूत्र · #17

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य