Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

ऐश्वर्यस्य विभूषणं सुजनता शौर्यस्य वाक्संयमो, ज्ञानस्योपशमः कुलस्य विनयो वित्तस्य पात्रे व्ययः। आक्रोशः तपसः क्षमा बलवतां धर्मस्य निर्व्याजता, सर्वेषामपि सर्वकारणमिदं शीलं परं भूषणं।।

ऐश्वर्य का आभूषण सज्जनता है, शौर्य का आभूषण वाणी संयम है, ज्ञान का आभूषण शान्ति है, कुल का आभूषण विनय है, धन का आभूषण सुपात्र में व्यय (दान) करना है, तप का आभूषण क्रोध नहीं करना है, बल का आभूषण क्षमा है, धर्म का आभूषण माया का अभाव है और इन ''सबका आभूषण ब्रह्मचर्य है''।

The ornament of wealth is goodness, of valour restraint of speech, of knowledge tranquillity, of noble birth humility, of riches giving to worthy recipients, of austerity freedom from anger, of strength forgiveness, of dharma the absence of deceit - and the ornament of all these is celibacy.

— आराध्य सूत्र · #3

इसी विषय के और सूत्र

सभी ब्रह्मचर्य →
जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य