शुचिः भूमिगतं तोयं, शुचिः नारी पतिव्रता। शुचिःधर्म परो राजा, ब्रह्मचारी सदाशुचिः।।
भूमि में गया हुआ जल पवित्र होता है, पतिव्रता नारी पवित्र होती है, धर्मपरायण राजा पवित्र होता है एवं ब्रह्मचारी सदा पवित्र होता है।
Water gone into the earth is pure, a devoted wife is pure, a dharma-abiding king is pure, and the celibate is always pure.
— आराध्य सूत्र · #7
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