Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

यः परदारेषु मातृवत्, परद्रव्येषु लोष्टवत्। आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति स पण्डितः।।

जो पर स्त्री में माता की तरह, परधन में मिट्टी के ढेले की तरह और प्राणी मात्र में अपने समान व्यवहार करता है वह पण्डित है।

One who treats another's wife as his mother, another's wealth as a clod of earth, and all beings as himself - he is the wise one.

— आराध्य सूत्र · #6

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य