Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

जो विसहदि दुव्वयणं, साहम्मि हीलणञ्च उवसग्गं। जिणिऊण कसाय रिऊं, तस्स हवे णिज्जरा विउला॥

जो व्यक्ति कषाय रूपी शत्रुओं को जीतता है, दूसरों के दुर्वचन सहन करता है, अन्य साधर्मी के द्वारा किये गये अनादर और देव आदि द्वारा किये गये उपसर्गों को सहता है उसकी बहुत निर्जरा होती है।

One who conquers the enemies that are the passions, endures others' harsh words, and bears the disrespect shown by fellow-believers and the afflictions caused by gods and the like, attains abundant shedding of karma.

— आराध्य सूत्र · #33

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा