Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

विपति धैर्यमथाभ्युदयेक्षमा, सदसि वाक्पटुता युधिविक्रमः। यशसि चाभिरुचि र्व्यसनं श्रुतौ, प्रकृति सिद्धमिदं हि महात्मनः।।

विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमाभाव, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में पौरुष, यश में अभिरुचि, स्वाध्याय का व्यसन इतने गुण महात्माओं में स्वभाव से होते हैं।

Patience in adversity, forgiveness in prosperity, eloquence in assembly, valour in battle, love of honour, and an addiction to self-study — these many virtues arise naturally in great souls.

— आराध्य सूत्र · #15

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