Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

आरम्भे णत्थि दया, महिलासंगेण णासए बम्भं। संकाए सम्मतं, पव्वज्जा अत्थ गहणेण।।

आरम्भ में दया नहीं होती, स्त्री की सङ्गति से ब्रह्मचर्य नष्ट हो जाता है, शङ्का से सम्यक्त्व एवं धनग्रहण करने से दीक्षा नष्ट हो जाती है।

There is no compassion in worldly enterprise; celibacy is destroyed by the company of women, right faith by doubt, and initiation by the accepting of wealth.

— आराध्य सूत्र · #1

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य