Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
मन

बन्धाय विषयासक्तं, मुक्तये निर्विषयं मनः। मन एव मनुष्याणाम्, कारणं बन्धमोक्षयोः।।

विषयासक्त मन कर्म बन्ध का कारण है, विषय विरक्त मन मोक्ष के लिए कारण है, अतः मनुष्य का मन ही बन्ध और मोक्ष का कारण है, एक मन नर से नारायण और एक मन नर से नारकी बना देता है, राम–रावण की तरह।

A mind attached to sense-objects causes karmic bondage; a mind detached from them causes liberation. Thus the human mind alone is the cause of both bondage and liberation—one mind makes a man into Narayan, another makes a man into a hell-being, as with Ram and Ravan.

— आराध्य सूत्र · #10

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आपके पास सिर्फ तीन ही चीजें हैं तन-मन और धन। अतः आप तन को अपने बीबी-बच्चों को दे देना, धन कुटुंब-कबीले को देना तो चल भी सकता है किन्तु 'मन' किसी को मत देना, मन तो मात्र परमात्मा के स्मरण में लगाना चाहिए।
मन