Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

जिससे यह आत्मा क्षणभर में अनन्त सुख से सहित हो जाती है, उस पवित्र चारित्र को बार–बार नमस्कार हो, चारित्र से बढ़कर उत्तम सुख को उत्पन्न करने वाला दूसरा नहीं है, ''निर्दोष क्रिया चारित्र का मूल है'', मैं निरन्तर अपना चित्त चारित्र में लगाता हूँ, हे चारित्र! तुम पूर्णता को प्राप्त होओ।

Repeated salutations to that holy conduct (charitra) by which the soul is filled with infinite bliss in an instant; nothing else produces higher happiness than conduct. 'Flawless action is the root of conduct.' I fix my mind ever upon conduct—O conduct, may you attain perfection!

— आराध्य सूत्र · #2

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