Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
वाणी

वाणी बोलकर अपने को, और सुनकर श्रोता को आनन्द की प्राप्ति नहीं हुयी तो बोलने का श्रम व्यर्थ है।

If speaking brings no joy to the speaker and listening none to the hearer, the effort of speaking is wasted.

— आराध्य सूत्र · #21

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