न तथा चन्दनं चन्द्रः, मणयो मालती स्रजः। कुर्वन्ति निर्वृतिं पुसां, यथा वाणी श्रुति प्रिया।।
चन्दन, चन्द्रमा और चन्द्रकान्त मणि की माला उस प्रकार सन्तुष्ट नहीं करती, जिस प्रकार कर्णप्रिय वाणी मनुष्य को सन्तुष्ट करती है।
Sandalwood, the moon, and a garland of moonstone gems do not soothe a person as much as words pleasing to the ear.
— आराध्य सूत्र · #25
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