वाणी से व्यक्ति की पहचान- एक बार जङ्गल में राजा, मन्त्री, कोतवाल, और सिपाही ये चारों भटक गये, उन्हें रास्ते में एक अन्धा व्यक्ति दिखा, राजा ने उससे पूँछा क्यों सूरदास जी क्या यहाँ से हमारे मन्त्री, कोतवाल, सिपाही निकले हैं? सूरदास ने कहा नहीं राजन्। थोड़ी देर में वहाँ से मन्त्री निकला, तो उसने पूँछा, क्यों सूरदास क्या यहाँ से हमारे राजा निकले हैं? सूरदास ने कहा हाँ मन्त्री जी। थोड़ी देर में कोतवाल निकला, तो वह भी अन्धे से पूँछता है, क्यों रे सूरदास क्या यहाँ से हमारे राजा, मन्त्री निकले हैं? उसने कहा हाँ कोतवाल जी। थोड़ी देर में वहाँ से सिपाही निकला, उसने भी अन्धे से पूँछा क्यों वे अन्धे क्या यहाँ से हमारे राजा निकले हैं? उसने कहा हाँ सिपाही। अन्धें ने वाणी से राजा, मन्त्री, कोतवाल, सिपाही को जाना।
A king, a minister, a constable, and a soldier once lost their way in a forest and met a blind man. Each in turn asked whether the others had passed by, and the blind man answered each correctly—recognizing the king, the minister, the constable, and the soldier merely by the way each of them spoke.
— आराध्य सूत्र · #34
–