Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
वाणी

सर्वलोके प्रिये तथ्ये, प्रसन्ने ललिताक्षरे। वाक्ये सत्यपि किं ब्रूते, निकृष्टः परुष वचः।।

सारे लोक में प्रिय, सार्थक, निर्मल और मनोहारी वाक्यों के होते हुए भी अज्ञानी पुरुष कठोर वचन क्यों बोलता है?

When pleasant, meaningful, pure and charming words exist for everyone, why does the ignorant man speak harsh words?

— आराध्य सूत्र · #22

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