Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

गुणाधिकतया मन्ये, स योगी गुणिनां गुरु। तन्निमित्तेऽपि निक्षिप्तं, क्रोधाधैर्यस्य मानसं।।

निमित्त मिलने पर भी जो क्रोधादि नहीं करता है, वह गुणों में अधिक होने से गुणियों का भी गुरू है।

One who does not give way to anger even when provoked, being richer in virtue, is a guru even to the virtuous.

— आराध्य सूत्र · #4

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा