Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

उपाध्याये नटे धूर्ते, कुट्टिन्यां तथैव च। माया तत्र न कर्तव्या, माया तैरेव निर्मिता।।

उपाध्याय, बहुरूपिया, धूर्त और वेश्या इनसे मायाचारी नहीं करना चाहिए क्योंकि माया को इन्होंने ही बनाया है।

One should not try deceit with a teacher, an impersonator, a cheat, or a courtesan—for it is they themselves who invented deceit.

— आराध्य सूत्र · #5

इसी विषय के और सूत्र

सभी चरित्र →