उपाध्याये नटे धूर्ते, कुट्टिन्यां तथैव च। माया तत्र न कर्तव्या, माया तैरेव निर्मिता।।
उपाध्याय, बहुरूपिया, धूर्त और वेश्या इनसे मायाचारी नहीं करना चाहिए क्योंकि माया को इन्होंने ही बनाया है।
One should not try deceit with a teacher, an impersonator, a cheat, or a courtesan—for it is they themselves who invented deceit.
— आराध्य सूत्र · #5
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