Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

मान पत्र को सब हर्ष से लेते हैं और क्रोध पत्र को कोई नहीं लेना चाहता है जबकि दोनों कषायों के भेद ही हैं।

Everyone gladly accepts a certificate of honour (maan-patra), yet no one wishes to accept anger—though both are merely varieties of the passions (kashaya).

— आराध्य सूत्र · #8

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा