Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

क्रोधी व्यक्ति कमठ के मठ में पहुँचता है और बैर का विकास करता है, संसार की लम्बी यात्रा करता है और क्षमावान पार्श्वनाथ के पार्श्व में विराजता है चिर, विश्राम और अपूर्व आनन्द पाता है।

The angry person reaches the hermitage of Kamath and develops enmity, undertaking the long journey through samsara; while the forgiving person is seated beside Parshvanath, attaining lasting rest and unprecedented bliss.

— आराध्य सूत्र · #136

इसी विषय के और सूत्र

सभी क्षमा →
कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा