Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अभिनन्दन आदि पाँच सौ मुनियों की क्षमा- दण्डक राजा ने कारण जाने विना रानी के कहने से मुनियों को पाखण्डी जानकर घानी में पेल दिया, लेकिन मुनियों ने क्षमा भाव धारण कर आत्म कल्याण किया था।

The forgiveness of five hundred monks including Abhinandan: King Dandaka, without knowing the cause and at his queen's word, took the monks for impostors and crushed them in an oil-press; yet the monks, holding to forgiveness, accomplished the welfare of their souls.

— आराध्य सूत्र · #127

इसी विषय के और सूत्र

सभी क्षमा →
कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा