Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

सर्प की क्षमा-एक सर्प ने मुनिराज से नियम ले लिया कि अब हम किसी को नहीं काटेगें, लोग उसको सताने लगे, वह महाराज के पास नियम वापिस करने गया तब महाराज ने कहा तुम्हे काटना छुड़ाया है फुड्ढारना नहीं।

A serpent's forgiveness: a snake took a vow from a monk that it would bite no one. People then began to torment it, and it went to the monk to return the vow. The monk said, 'I made you give up biting, not hissing.'

— आराध्य सूत्र · #122

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा