यः श्वभ्रान्मां समाकृष्य, क्षिपत्यात्मानमस्तधीः। वधबन्धनिमित्तेऽपि, कस्तस्मै विप्रियं चरेत् ॥16॥
जो नरक से मुझको निकालकर स्वयं अपने को नरक में डाल रहा है तो कौन बुद्धिमान उपसर्ग आदि का प्रतिकार करेगा ?
One who pulls me out of hell while casting himself into it — what wise person would retaliate against him for the afflictions he causes?
— आराध्य सूत्र · #104
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