Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

वासी चन्दनतुल्यान्त, वृत्तिमालम्ब्य केवलं। आरब्ध सिद्धिमानीतं, प्राचीनैः मुनि सत्तमैः ॥15॥

कुल्हाड़ी और चन्दन में समता रखकर के ही प्राचीन मुनियों ने सिद्धि प्राप्त की है।

Only by holding equal regard for the axe and for sandalwood did the ancient great monks attain accomplishment.

— आराध्य सूत्र · #103

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा