Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

नास्ति क्रोध समं पापं, नास्ति क्रोध समं रिपुः। क्रोधो मूलमनर्थानां, तस्मात् क्रोधं विवर्जयेत् ॥9॥

क्रोध के समान पाप व शत्रु दूसरा नहीं है, क्रोध समस्त अनर्थों का मूल है इसलिए छोड़ देना चाहिये।

There is no sin like anger, no enemy like anger; anger is the root of all calamities, therefore it should be abandoned.

— आराध्य सूत्र · #99

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा