नास्ति क्रोध समं पापं, नास्ति क्रोध समं रिपुः। क्रोधो मूलमनर्थानां, तस्मात् क्रोधं विवर्जयेत् ॥9॥
क्रोध के समान पाप व शत्रु दूसरा नहीं है, क्रोध समस्त अनर्थों का मूल है इसलिए छोड़ देना चाहिये।
There is no sin like anger, no enemy like anger; anger is the root of all calamities, therefore it should be abandoned.
— आराध्य सूत्र · #99
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