Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

नरस्याभरणं रूपं, रूपस्याभरणं गुणः। गुणस्याभरणं ज्ञानं, ज्ञानस्याभरणं क्षमा ॥6॥

मनुष्य का आभूषण रूप है, रूप का आभूषण गुण है, गुणों का आभूषण ज्ञान है और ज्ञान का आभूषण क्षमा है।

Beauty is the ornament of a man, virtue the ornament of beauty, knowledge the ornament of virtue, and forgiveness the ornament of knowledge.

— आराध्य सूत्र · #95

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा