Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

करोतु न चिरं घोरं तपः क्लेशासहो भवान्। चित्तसाध्यान् कषायारीन् न जयेत् तदज्ञता ॥2॥

शरीर मे सामर्थ्य न होने से चिरकाल तक तपश्चरण नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, किन्तु मन से वश में करने योग्य जो कषाय रूपी शत्रु हैं, अगर उन्हे वश मे नहीं करते हो तो ये तुम्हारी अज्ञानता है।

If, lacking bodily strength, you cannot perform long severe austerities, never mind; but if you do not subdue the enemy of passions which the mind can control, that is your ignorance.

— आराध्य सूत्र · #90

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा