Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

क्षमा शस्त्र करे यस्य, दुर्जनः किं करिष्यति। अतृणे पतिता वह्निः, स्वयमेवोपशाम्यति ॥1॥

जिसके हाथ मे क्षमा रूपी शस्त्र है, उसका दुर्जन क्या करेगा क्योंकि तृणहीन स्थान में गिरी अग्नि स्वयं शान्त हो जाएगी।

What can a wicked man do to one who wields the weapon of forgiveness? For fire fallen on a grassless spot dies down of itself.

— आराध्य सूत्र · #89

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा