Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

दुर्जन क्रूर कुमार्ग रतों पर क्षोभ नहीं मुझको आवे। साम्य भाव रक्खूँ में उन पर ऐसी परिणति हो जावे ॥11॥

May I feel no agitation toward the wicked, the cruel, and those set on wrong paths; may my disposition become such that I hold equanimity even toward them.

— आराध्य सूत्र · #84

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा