Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

काले भुजङ्ग मन के सदृश जब क्रोध का हो अवतरण, तो जीभ में टाँके लगा मैं मौन की लेलूँ शरण। मुझ पर चलाये जो दनादन क्रोध रञ्जित गोलियाँ, उत्तम क्षमा से नाथ मैं भरदूँ उसकी झोलियाँ ॥6॥

When anger descends like a black serpent upon the mind, may I stitch up my tongue and take refuge in silence. And whoever fires bullet after bullet dipped in anger at me, O Lord, may I fill his lap with the gift of supreme forgiveness.

— आराध्य सूत्र · #79

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा