Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

मृगमीनसज्जनानां, तृणजलसन्तोषविहित वृत्तीनां। लुब्धकधीवरपिशुनाः, निष्कारणवैरिणो भवन्ति।।

हिरण घास में सन्तुष्ट रहता है, मछली जल में सन्तुष्ट रहती है, सज्जन सन्तोषी होते हैं फिर भी शिकारी हिरन का, मछुआरा मछली का और दुष्ट लोग सज्जनों के अकारण बैरी होते हैं।

The deer is content with grass, the fish content in water, and good people are content; yet the hunter is the deer's, the fisherman the fish's, and the wicked the good people's enemy without cause.

— आराध्य सूत्र · #51

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा