Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

क्षणे रुष्टा क्षणे तुष्टा, रुष्टातुष्टाश्च क्षणे-क्षणे। अव्यवस्थित चित्तानां, प्रसादोऽपि भयङ्कराः।।

जिनका मन वश में नहीं होता है वे क्षण भर में सन्तुष्ट हो जाते हैं और क्षणभर में गुस्सा हो जाते हैं उनकी प्रसन्नता भी दुःखदायी होती है।

Those whose mind is not under control are pleased in a moment and angry in a moment, angry and pleased moment by moment; even the favour of such unsteady-minded people is dangerous.

— आराध्य सूत्र · #49

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा