Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

परस्पर के घर्षण से वन के वृक्षों में अग्नि उत्पन्न होने पर वे वृक्ष ही जलते हैं, परन्तु क्रोध रूपी अग्नि नियम से सम्यग्दर्शन रूपी वृक्ष को भी जला देती है।

When fire arises from the mutual friction of forest trees, only those trees burn; but the fire of anger inevitably burns even the tree of right-faith.

— आराध्य सूत्र · #29

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा