Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

वाणी और शरीर में कम्पन होने लगता है।

The voice and body begin to tremble.

— आराध्य सूत्र · #9

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा