न कश्चित् कस्यचिद् मित्रं, न कश्चित् कस्यचिद् रिपुः। व्यवहारेण जायन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा।।
न कोई किसी का मित्र है, न कोई किसी का शत्रु है व्यवहार से ही मित्र और शत्रु बनते हैं।
No one is anyone's friend and no one is anyone's foe; friends and enemies are made only through conduct.
— आराध्य सूत्र · #4
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