स्वयूथ्यान्प्रति सद्भाव, सनाथाऽपेत कैतवा। प्रतिपत्तिर्यथायोग्यं, वात्सल्यमभिलप्यते।।
सद्भाव सहित और मायाचारी से रहित होकर साधर्मियों की यथायोग्य सेवा करना वात्सल्य कहलाता है।
Serving one's co-religionists appropriately, with goodwill and free of deceit, is called vatsalya (affectionate loyalty).
— आराध्य सूत्र · #1
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