Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

कालुष्य कारणे जाते, दुर्निवारे गरीयसि। नान्तः क्षुभ्यति कस्मिंश्चिच्छान्तात्मासौ निगद्यते।।

महान् दुर्निवार कलुषता के कारण उपस्थित हो जाने पर भी अन्तरङ्ग में क्षोभ नहीं होना उपशम कहलाता है।

Even when a great, irresistible cause of defilement arises, remaining inwardly free of agitation is called upashama (tranquillity).

— आराध्य सूत्र · #30

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा