कालुष्य कारणे जाते, दुर्निवारे गरीयसि। नान्तः क्षुभ्यति कस्मिंश्चिच्छान्तात्मासौ निगद्यते।।
महान् दुर्निवार कलुषता के कारण उपस्थित हो जाने पर भी अन्तरङ्ग में क्षोभ नहीं होना उपशम कहलाता है।
Even when a great, irresistible cause of defilement arises, remaining inwardly free of agitation is called upashama (tranquillity).
— आराध्य सूत्र · #30
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