Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

गुणाः कुर्वन्ति दूतत्वं, दूरेऽपि वसतां सतां। केतकी गंधमाघ्राय, स्वयमायान्ति षट्पदाः।।

सज्जनों के दूर रहने पर भी गुण दूत की तरह काम करते हैं जिस प्रकार केतकी की गन्ध को सूंघकर भोरें स्वयं आ जाते हैं।

Even when the good live far away, their virtues act as messengers, just as bees come of their own accord on smelling the fragrance of the ketaki flower.

— आराध्य सूत्र · #18

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