खलानां कण्टकानां च, द्विधैव हि प्रतिक्रिया। उपानन्मुख भङ्गो वा, दूरतः परिवर्जनं।।
दुष्टों व काँटों के प्रति दो प्रकार की प्रतिक्रिया होती है, या तो उनका जूते से मुख भङ्ग कर दो, या दूर से छोड़कर चले जाओ।
There are only two responses to the wicked and to thorns: either crush their face with a shoe, or leave them far behind and walk away.
— आराध्य सूत्र · #9
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