Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

दोषान् गृह्णाति यत्नेन, गुणांस्त्यजति दूरतः। दोषग्राही गुणत्यागी, चालनिरिव दुर्जनः।।

दुर्जन चलनि की तरह दोषों को यत्न पूर्वक ग्रहण करता है और गुणों को दूर से ही छोड़ देता है।

Like a sieve, the wicked man carefully retains the faults and lets the virtues fall away.

— आराध्य सूत्र · #8

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