Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

सत्सङ्गति का फल बुद्धि है, बुद्धि का फल दुराग्रह का त्याग है, दुराग्रह के त्याग का फल शान्ति है और शान्ति रूपी वृक्ष का फल सुख है।

The fruit of good company is wisdom, the fruit of wisdom is the giving up of obstinacy, the fruit of giving up obstinacy is peace, and the fruit of the tree of peace is happiness.

— आराध्य सूत्र · #24

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति