Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

पृथिवी पर नीम के वृक्ष बहुत दिखाई देते हैं परन्तु चन्दन कहीं-कहीं प्राप्त होता है, पत्थरों से पृथिवी भरी पड़ी है परन्तु चिन्तामणि रत्न दुर्लभ है, कौओं की काँव-काँव सदा सुनायी पड़ती है परन्तु कोयल की कूक यदा-कदा ही सुनायी पड़ती है, इससे पता चलता है कि यह जगत् दुर्जनों से व्याप्त है सज्जन तो पृथिवी पर थोड़े ही हैं।

Neem trees are seen everywhere on earth, but sandalwood is found only here and there; the earth is full of stones, but the wish-fulfilling gem is rare; the cawing of crows is heard always, but the cuckoo's song only now and then. This shows that the world is filled with the wicked, and the good on earth are but few.

— आराध्य सूत्र · #21

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति