Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

सेठ जी ने गाड़ी खरीदी पन्द्रह दिन ड्राईवर के पास बैठकर देख लिया कैसे चलाता है और ड्राईवर की छुट्टी कर दी और स्वयं चलाने लगे, जङ्गल में गाड़ी बिगड़ गयी, कुछ जानते नहीं थे, अतः दूसरे से मदद लेकर घर पहुँचे, इसी प्रकार जब तक मोक्ष मार्ग के सच्चे ड्राईवर न बन जायें, तब तक गुरुओं की सङ्गति में रहना चाहिए।

A merchant bought a car, watched the driver for fifteen days to see how he drove it, then dismissed the driver and began to drive himself. The car broke down in the forest and, knowing nothing, he reached home only with another's help. Likewise, until you become a true driver on the path to liberation, you should remain in the company of the gurus.

— आराध्य सूत्र · #20

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति