वाणी विना बुद्धि का वक्ता, विना लगाम के घोड़े की तरह होता है। A speaker without wisdom is like a horse without a rein. — आराध्य सूत्र · #8 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
दूसरों की निंदा और अपनी प्रशंसा करने से नीचगोत्र का बंध होता है और वह बंध दूसरे गुणस्थान तक ही होता है अतः निंदा करने वाला नियम से ही मिथ्यादृष्टि पापी है। वाणी 0 – भेजें