वाणी नम्रता, मिष्ठवाणी और मधुर व्यवहार आपके श्रेष्ठ मित्र हैं। Modesty, sweet speech and gracious conduct are your best friends. — आराध्य सूत्र · #35 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
दूसरों की निंदा और अपनी प्रशंसा करने से नीचगोत्र का बंध होता है और वह बंध दूसरे गुणस्थान तक ही होता है अतः निंदा करने वाला नियम से ही मिथ्यादृष्टि पापी है। वाणी 0 – भेजें