Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

सर्पों के द्वारा डसे हुए मनुष्यों का शरीर ही नष्ट होता है, परन्तु दुर्जन के द्वारा डसा हुआ मनुष्यों का वंश, वैभव, पाण्डित्य, क्षमा तथा कीर्ति आदि गुण क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं।

For those bitten by serpents only the body is destroyed, but for those bitten by a wicked person the lineage, prosperity, learning, forbearance, fame and other virtues are destroyed in a moment.

— आराध्य सूत्र · #28

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति