Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

पड़ोसी से प्रेम करने वाला व्यक्ति विपत्ति में भी सुखी रहता है, क्योंकि पड़ोसी सहयोग करता है और पड़ोसी से बैर रखने वाला व्यक्ति सम्पत्ति में भी दुःखी रहता है क्योंकि पड़ोसी परेशान करता है।

One who loves his neighbour remains happy even in adversity, for the neighbour helps him; and one who bears enmity toward his neighbour remains unhappy even in prosperity, for the neighbour troubles him.

— आराध्य सूत्र · #16

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति