Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

मूर्खैरलब्धतत्त्वैश्च सहालापश्चतुर्फलः। वाचो व्ययो मनस्ताप, मपवादश्च ताड़नं।।

अनुभवहीन व मूर्खों से बात करने के चार फल वचनों का व्यय, मानसिक सन्ताप, अपयश और प्रतारणा प्राप्त होती है।

Conversing with the inexperienced and foolish yields four fruits: waste of words, mental anguish, disrepute, and deception.

— आराध्य सूत्र · कण्ठाभरण श्लोक · #25

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति