Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

तुष्यन्ति भोजने विप्राः, मयूरा घन गर्जने। साधवः पर सम्पत्तौ, खलाः पर विपत्तिषु।।

ब्राह्मण भोजन से सन्तुष्ट होते हैं, मयूर मेघ के गरजने से सन्तुष्ट होते हैं, सज्जन दूसरों की सम्पत्ति को देखकर सन्तुष्ट होते हैं, और दुष्ट दूसरों की विपत्ति को देखकर सन्तुष्ट होते हैं।

Brahmins are pleased by a feast, peacocks by the thunder of clouds, the good by seeing the prosperity of others, and the wicked by seeing the misfortune of others.

— आराध्य सूत्र · कण्ठाभरण श्लोक · #16

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