Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

येषां न विद्या तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्म:। ते मर्त्य लोके भुवि भार भूता:, मनुष्य रूपेण मृगाश्चरन्ति।।

जिनके पास विद्या, तप, दान, ज्ञान, ब्रह्मचर्य, गुण और धर्म नहीं है वे मनुष्य लोक में पृथ्वी पर भार स्वरूप मनुष्य के रूप में पशु के समान विचरण कर रहे हैं।

Those without learning, austerity, charity, knowledge, celibacy, virtue or dharma are a burden upon the earth in the mortal world — they roam in human form like beasts.

— आराध्य सूत्र · #45

इसी विषय के और सूत्र

सभी चरित्र →