Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

अच्छी संगति से बढ़कर आदमी का सहायक और कोई नहीं है और कोई वस्तु इतनी हानि नहीं पहुँचाती, जितनी की दुर्जन की संगति।

There is no greater helper to a person than good company, and nothing harms so much as the company of the wicked.

— आराध्य सूत्र · #5761

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति